बीत गए कुछ लम्हे हँसते,
रोते रोते कुछ बीते -
कितना ही कुछ हार गए हम ,
लेकिन थोडा-सा जीते..
दूर कहीं जो बीत गयी वो
बात पुरानी लगती है -
रोज़ नया दिन अब तो हमको
नयी कहानी लगती है ;
दिल के जो भी हुए थे टुकड़े
बैठे हैं उनको सीते -
कितना ही कुछ हार गए हम,
लेकिन थोडा-सा जीते ..
जिनको भी समझा था अपना-
जिनसे दुनिया बसती थी,
जिनके होने से ही हम थे
जिनसे अपनी हसती थी -
छोड़ गए वो कितना तनहा,
आंसू भी अब तो रीते !
कितना ही कुछ हार गए हम,
लेकिन थोडा-सा जीते ..
जीवन के हैं खेल निराले
हार-जीत का पता नहीं -
शीशमहल- सा जादू है सब ;
सही गलत, तो गलत सही !
कहीं कहीं पे सही रहे हम
लेकिन कहीं गलत भी थे -
कितना ही कुछ हार गए हम,
लेकिन थोडा-सा जीते..
रोते रोते कुछ बीते -
कितना ही कुछ हार गए हम ,
लेकिन थोडा-सा जीते..
दूर कहीं जो बीत गयी वो
बात पुरानी लगती है -
रोज़ नया दिन अब तो हमको
नयी कहानी लगती है ;
दिल के जो भी हुए थे टुकड़े
बैठे हैं उनको सीते -
कितना ही कुछ हार गए हम,
लेकिन थोडा-सा जीते ..
जिनको भी समझा था अपना-
जिनसे दुनिया बसती थी,
जिनके होने से ही हम थे
जिनसे अपनी हसती थी -
छोड़ गए वो कितना तनहा,
आंसू भी अब तो रीते !
कितना ही कुछ हार गए हम,
लेकिन थोडा-सा जीते ..
जीवन के हैं खेल निराले
हार-जीत का पता नहीं -
शीशमहल- सा जादू है सब ;
सही गलत, तो गलत सही !
कहीं कहीं पे सही रहे हम
लेकिन कहीं गलत भी थे -
कितना ही कुछ हार गए हम,
लेकिन थोडा-सा जीते..
भुवनेश्वर
२९-३० दिसंबर २०१०