जय हो ! हे साधारण जन !
सीधी साधी दुनिया तेरी
सीधा सच्चा तेरा मन -
जय हो ! हे साधारण जन !!
देश जले या कटे कही भी
तुझ को किंचित क्लेश नहीं
तुझ को टुकड़ा उस को पूरा -
लेकिन फिर भी द्वेष नहीं
भग्न-हिमालय-गंग-धार सा
शीतल निर्मल तेरा मन !
जय हो ! हे साधारण जन !!
दिन दिन प्रतिदिन वही पुरानी
ढर्रे वाली दुनिया भी
नाक बहाता छोटा मुन्ना
रोती रोती मुनिया भी -
तुझको विचलित नहीं कर सके
भीष्म के जैसा तेरा प्रण !
जय हो ! हे साधारण जन !!
धन्य धन्य तू - महाधन्य है
परमहंस- सा तू ज्ञानी !
सार - सार जो बात समझनी
तूने उतनी बस जानी !
बुद्धिजीवी रहे फोड़ते
माथा अपना दन-दन-दन !
जय हो ! हे साधारण जन !!
सोमवार, १५ जुलाई २०१३
गुडगाँव
सीधी साधी दुनिया तेरी
सीधा सच्चा तेरा मन -
जय हो ! हे साधारण जन !!
देश जले या कटे कही भी
तुझ को किंचित क्लेश नहीं
तुझ को टुकड़ा उस को पूरा -
लेकिन फिर भी द्वेष नहीं
भग्न-हिमालय-गंग-धार सा
शीतल निर्मल तेरा मन !
जय हो ! हे साधारण जन !!
दिन दिन प्रतिदिन वही पुरानी
ढर्रे वाली दुनिया भी
नाक बहाता छोटा मुन्ना
रोती रोती मुनिया भी -
तुझको विचलित नहीं कर सके
भीष्म के जैसा तेरा प्रण !
जय हो ! हे साधारण जन !!
धन्य धन्य तू - महाधन्य है
परमहंस- सा तू ज्ञानी !
सार - सार जो बात समझनी
तूने उतनी बस जानी !
बुद्धिजीवी रहे फोड़ते
माथा अपना दन-दन-दन !
जय हो ! हे साधारण जन !!
सोमवार, १५ जुलाई २०१३
गुडगाँव