Tuesday, December 20, 2016

विवाह के पहले 6 माह पर

कल की  सी बात है लगती, पर
लो बीता आधा वर्ष  - 
आई थी जब तुम ले मेरे 
जीवन में एक नूतन हर्ष !

प्रथम बार देखा था तुमने ,
प्रथम बार  मुस्काई भी -
शरमाई थी प्रथम बार ही ,
प्रथम बार सकुचाई ही !
स्वप्न सदृश-सा ही लगता है 
प्रथम प्रेम का पहला स्पर्श !
आई थी जब तुम ले मेरे 
जीवन में एक नूतन हर्ष !

कभी रही तुम अल्हड सी, औ'
कभी अतिशय गरिमामय !
कभी रुष्ट, कभी खफा- सी मुझ से - 
कभी मुझी में बस तन्मय !
"जीवन का आधार तुम्ही, बस !"
इन छः मासों का निष्कर्ष -
आई हो, हाँ ! तुम ले मेरे 
जीवन में एक नूतन हर्ष !

24 अक्टूबर 2012, गुडगाँव 

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