संवेग-प्रवाह
Monday, February 13, 2012
फिर से रुमानी
तन्हाई को बोलने दो -
यादों की दस्तक पे
कभी दिल के दरवाज़े खोलने दो !
हंसो कभी, मुस्कुराओ थोडा,
दोहराओ वही कहानी -
कभी कभी अच्छा ही है
'गर हो जाओ फिर रुमानी
१०.०२. २०११, मुंबई
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