Sunday, December 18, 2016

समझौता


अपने हालात से
समझौता किये जाता हूँ
फ़ना होता हूँ हर एक लम्हा मैं
हर एक लम्हा मैं जिए जाता हूँ


ग़ुम हो जाता हूँ मैं 
अपनी ही तनहाइयों में
और तनहाइयों में ही
सुकूँ पाता हूँ
फ़ना होता हूँ हर एक लम्हा मैं
हर एक लम्हा मैं जिए जाता हूँ


छोड़ बैठा हूँ मैं
उम्मीद एक उजाले की
अब अंधेरों में ही
गुनगुनाता हूँ
फ़ना होता हूँ हर एक लम्हा मैं
हर एक लम्हा मैं जिए जाता हूँ


मुंबई, ३० सितम्बर २०११







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