Saturday, September 17, 2011

वन्दना

नमस्काराये श्री गुरुदेवोः 
नमस्कारये आत्मदेवयो
नमस्कारये श्रीमन्न ब्रह्मदेवो
सर्व नमस्कारये नमो नमः

मुझे नहीं पता की इस "वन्दना" की संस्कृत किस हद तक सही है - मैंने कभी संस्कृत ही औपचारिक शिक्षा नह ली है. ये शब्द आज पूजा करते हुए मेरे अन्दर से निकले (जैसे मेरी अधिकाँश कवितायें निकलती हैं) और मैं उन शब्दों को ही यहाँ उस रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जैसे वे मेरे अन्दर प्रकट हुए.
किंचित, वेद के मंत्र-दृष्टा ऋषियों को भी इसी प्रकार मंत्र प्रकट हुए होंगे !!

- हेमंत शर्मा
मुंबई, १७ सितम्बर २०११ 


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