एक ही दिवस नहीं होता है
मित्रता दर्शाने का -
मित्रता तो नाम है
जीवन भर साथ निभाने का
एक दिन ही बस बतला दो
की "हम और तुम तो दोस्त रहे"
और कभी न मुड के देखो
कौन कहीं, कहीं कौन रहे !
नाम नहीं है ये तो ऐसे
अपना जी बहलाने का -
मित्रता तो नाम है
जीवनभर साथ निभाने का
मित्र जिसे जब भी जो पुकारो
भाव समर्पण का रखना
सम्बन्धी वो नहीं तुम्हारा
लेकिन फिर भी है अपना !
छोड़ चले जब सब जग तुमको
काम मित्र ही आने का -
मित्रता तो नाम है
जीवनभर साथ निभाने का
मुंबई, "मित्रता दिवस"
०७ अगस्त २०११
nice poem bhaiya..!
ReplyDeleteNicely written :)
ReplyDeletegood one bhaiya.. :)
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