तुम कर्ता
धर्ता भी तुम ही
तुम ही हो जग के आधार
हम सब कठपुतलियां है तेरी
लीला तेरी अपरम्पार
जो होता
तुझसे होता है
हम बस माध्यम मात्र रहे
सुख दे तू तो सुख से रह लें
दुःख दे तो वो दुःख भी सहें
गर्व न हो
कभी लेशमात्र भी
जो दीखता सब है लीला
तेरी, तू ही विश्वनियन्ता
जैसे चाहे तू खेला
कर जोडें
हम करे ये विनती
हमको इतना ज्ञान रहे
हम हैं तेरे अंश सदा ही
बस तेरा ही ध्यान रहे
भुवनेश्वर २६.०२.२०११ ००:०४
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