Tuesday, February 22, 2011

पल

लम्हे फिसलते जा रहे हैं हाथो से
रेत की जैसे...
वक़्त
पल पल कर गुज़र रहा है
धीरे धीरे...
कुछ हैं मतवाले जो
पकड़ना चाह रहे हैं
इन लम्हों को
और कुछ
खुश है के
वे ये लम्हे जी पाए !!

- भुवनेश्वर २१.०२.२०११ 

1 comment:

  1. Anonymous10:26 AM

    You are very good in writing. I like almost all of them. Thanks.

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