Saturday, February 26, 2011

विनती

तुम कर्ता 
धर्ता भी तुम ही
तुम ही हो जग के आधार
हम सब कठपुतलियां है तेरी
लीला तेरी अपरम्पार

जो होता 
तुझसे होता है 
हम बस माध्यम मात्र रहे
सुख  दे तू तो सुख  से रह लें
दुःख दे तो वो दुःख भी सहें 

गर्व न हो
कभी लेशमात्र भी
जो दीखता सब है लीला
तेरी, तू ही विश्वनियन्ता
जैसे चाहे तू खेला 

कर जोडें
हम करे ये विनती
हमको इतना ज्ञान रहे
हम हैं तेरे अंश सदा ही
बस तेरा ही ध्यान रहे 

भुवनेश्वर २६.०२.२०११  ००:०४ 




Wednesday, February 23, 2011

मित्र के विवाह पर बधाईयाँ

सुखी गृहस्थी हो
चहके आँगन
संतोष रहे सदा मन में
प्रीत हो पक्की
एक दूजे से
सदा वसंत हो जीवन में !

Tuesday, February 22, 2011

पल

लम्हे फिसलते जा रहे हैं हाथो से
रेत की जैसे...
वक़्त
पल पल कर गुज़र रहा है
धीरे धीरे...
कुछ हैं मतवाले जो
पकड़ना चाह रहे हैं
इन लम्हों को
और कुछ
खुश है के
वे ये लम्हे जी पाए !!

- भुवनेश्वर २१.०२.२०११