न भूख हो, न भय हो,
और न ही बेबसी न लाचारी हो,
हे ईश्वर ! ये नववर्ष सर्वथा
पूरण सुखकारी हो !
हो प्रेम जगत में, भाईचारा
बढे, रहे सुख शांति.
सोते से जागे सारे जन
होवे अब नूतन क्रांति -
क्रांति हो सुख की, समृद्धि की
क्रांति ये होवे ज्ञान की
हो राम, रहीम या ईसा -
सब को होवे समझ भगवान की !
दीप्त ह्रदय हो, उन्नत मस्तक,
मुद्रा गर्वोंकारी हो -
हे ईश्वर ! ये नववर्ष सर्वथा
पूरण सुखकारी हो
- भुवनेश्वर ०१.०१.२०११, ००:३६