Monday, December 05, 2011

क्यों

टूटे  हुए  साथों  को
छूटे  हुए  हाथों  को 

याद  कभी  कर  ही  लेता  है  दिल  -

पर  ये  आँखें  क्यों  भर  आती  हैं  ??

मुंबई, ०५.१२.२०११ 

Thursday, November 24, 2011

उदासी


आज फिर दिल उदास है -
हूक उठ रही है है कहीं कोई
वो पुराना दर्द आज फिर पास है,
आज फिर दिल उदास है

नाम नहीं ले पा रहा है उसका
न चेहरा ही याद आ रहा है इसको
लेकिन कोई तो है कहीं जो इसका ख़ास है -
आज फिर दिल उदास है

मुंबई, २४ नवम्बर २०११ 

Thursday, September 22, 2011

जीवन का अर्थ

जीवन का अर्थ -
जीवन को खोजने में नहीं ,
जीवन को जीने में है !

जीवन का अर्थ -
एक एहसास है, 
जो 
महसूस ही किया जा सकता है -
समझा नहीं जाता है इसको !

जीवन का अर्थ -
जादुई होता है हकीकत में !
बस
एक शब्द में भी समां जाए जो
और हजारों हज़ार ग्रंथो में 
भी जो न आ पाए !


जीवन का अर्थ -
कोई सिखा नहीं सकता तुम्हे,
इसे 
खुद जियो, समझो, जानो -
जैसे तुम समझना चाहो...

जीवन का अर्थ -
महसूस करना आसाँ है कितना !
देखो
एक हँसते हुए बच्चे को-
कितने अच्छे से वो जानता है 
जीवन का अर्थ !! 

मुंबई, २२ सितम्बर २०११ 








Sunday, September 18, 2011

ठहराव

एक ठहराव सा है
जीवन में -
सब कुछ
रुका रुका सा ;
इंतज़ार-सा करता हुआ किसी का....
पता नहीं किसका !
पता नहीं क्यूँ
रुका रुका सा है सब...
दिन गुज़रते हैं
मुश्किल से;
मुश्किल से 
वक़्त गुज़रता है -
वक़्त का तेज़ पहिया भी
धीरे धीरे चलता है .
न उम्मीद कोई
न तमन्ना ही रही
"चलने दो जैसे
जिसे जो चलता है"
एक ठहराव सा है
जीवन में -
सब कुछ
रुका रुका सा....

मुंबई, १८ सितम्बर २०११ 

Saturday, September 17, 2011

वन्दना

नमस्काराये श्री गुरुदेवोः 
नमस्कारये आत्मदेवयो
नमस्कारये श्रीमन्न ब्रह्मदेवो
सर्व नमस्कारये नमो नमः

मुझे नहीं पता की इस "वन्दना" की संस्कृत किस हद तक सही है - मैंने कभी संस्कृत ही औपचारिक शिक्षा नह ली है. ये शब्द आज पूजा करते हुए मेरे अन्दर से निकले (जैसे मेरी अधिकाँश कवितायें निकलती हैं) और मैं उन शब्दों को ही यहाँ उस रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ, जैसे वे मेरे अन्दर प्रकट हुए.
किंचित, वेद के मंत्र-दृष्टा ऋषियों को भी इसी प्रकार मंत्र प्रकट हुए होंगे !!

- हेमंत शर्मा
मुंबई, १७ सितम्बर २०११ 


Sunday, August 07, 2011

मित्रता दिवस पर

एक ही दिवस नहीं होता है
मित्रता दर्शाने का -
मित्रता तो नाम है
जीवन भर साथ निभाने का

एक दिन ही बस बतला दो
की "हम और तुम तो दोस्त रहे"
और कभी न मुड के देखो
कौन कहीं, कहीं कौन रहे !
नाम नहीं है ये तो ऐसे
अपना जी बहलाने का - 
मित्रता तो नाम है 
जीवनभर साथ निभाने का 

मित्र जिसे जब भी जो  पुकारो
भाव समर्पण का रखना
सम्बन्धी वो नहीं तुम्हारा
लेकिन फिर भी है अपना !
छोड़ चले जब सब जग तुमको
काम मित्र ही आने का -
मित्रता तो नाम है 
जीवनभर साथ निभाने का 

मुंबई, "मित्रता दिवस"
०७ अगस्त २०११ 

Monday, July 25, 2011

उम्र बिता दी

उम्र बिता दी बेज़ा हमने
अच्छे से कुछ कर न सके
पूरा जूझ न पाए गम से
पूरा और हम डर न सके

अच्छा जिसको समझा हमने
उसने ही तो बुरा किया
बुरा जो करते थे उनका भी
अच्छा थोडा कर न सके
उम्र बिता दी बेजा हमने..

खुश थे कितने 
कितने गमगीं
कितने ऐसे वैसे थे
जैसे थे वैसे अच्छे थे
बदल नया कुछ कर न  सके
उम्र बिता दी बेज़ा हमने..

बचपन के कितने थे अरमाँ
कितने ही तो सपने थे
सपने ही सपने रह पाए
बच्चे थे - कुछ कर न सके
उम्र बिता दी बेज़ा हमने

बदल गया जो हमको उसने
मुडके भी फिर न देखा
दूर तलक बस देख ही पाए
रहे पड़े जड़ - चल न सके
उम बिता दी बेज़ा हमने

कभी कहीं तो कभी कहीं पर
सोचा कहीं किनारा हो
घुमे ऐसे ही आवारा
एक कोई घर कर न सके
उम्र बिता दी बेज़ा हमने...

कभी उसे ईमान बनाया
उसकी कहीं दुहाई दी
लेकिन कोई एक ही मालिक
अल्लाह इश्वर कर न सके
उम्र बिता दी बेज़ा हमने...


Saturday, June 25, 2011

विदाई के पल


विदाई के पल    
कभी   अंतिम   नहीं   होते  

विदाई के पल  
हमें   बताते   हैं  
कि   
मिलना   है  हमें   एक बार   फिर  - से  
कहीं   किसी   और   मोड़ पे
एक दूसरे से  

विदाई के पल 
कहते  हैं  ये  हम से 
कि 
रुक  न  जाना  राह  में कहीं 
चलते  रहना  
एक नई  मंजिल  की  ओर 

विदाई के पल 
ये  भी  बतलाते  हैं 
कि
"जीवन में  आते  रहेंगे हम
हर नयी मंजिल के साथ 
नए  साथियों  को  ले  कर "

विदाई के पल 
जाते  जाते  भी 
हमें  कितना  कुछ  दे  जाते  हैं  
हाँ , विदाई के पल  कभी  अंतिम  नहीं  होते 


पुणे , २४ .०६ .२०११

Saturday, May 07, 2011

सगाई

नूतन दिवस, नए सब सपने 
नया नया सा सब कुछ
बीत गयी हर बात पुरानी
नहीं पुराना अब कुछ 

नए नए सब रिश्ते सारे
नयी नयी शुरुआत
सदा रहे अब हाथ में तेरे
प्रेयसी, प्रिय का हाथ 

हैं प्रसन्न-चित्त  पिता औ माता
खुश है  मित्र औ भाई 
बहुत बहुत हो शुभ तुम को ये  
मुझ से आज  सगाई 

Friday, March 04, 2011

আমার আশা

আমি আর কিচ্ছু চাই না - 
তুমি এস ফিরে আমার জীবন তে
শুধু একটা আমার আশা...
তুমি আমার জীবন, আমার প্রাণ
শুধু তুমি আমার ভালভাসা 

আলবার ১০.০৬.২০১০ 

This is an old poem i found scribbled in a notepad...not very relevant now..was quite relevant wen it was written !!

Wednesday, March 02, 2011

अलविदा

एक और मंजिल
एक और पड़ाव -
कुछ साथी छूटते  हुए,
कुछ दिल टूटते हुए...
कुछ यादें
कुछ बातें
कुछ खट्टी
कुछ मीठी
बस...
और एक 
डोर
बांध रही है जो
उम्र भर के लिए 

भुवनेश्वर , ०२.०३.२०११, ००:२४ प्रातः 



Saturday, February 26, 2011

विनती

तुम कर्ता 
धर्ता भी तुम ही
तुम ही हो जग के आधार
हम सब कठपुतलियां है तेरी
लीला तेरी अपरम्पार

जो होता 
तुझसे होता है 
हम बस माध्यम मात्र रहे
सुख  दे तू तो सुख  से रह लें
दुःख दे तो वो दुःख भी सहें 

गर्व न हो
कभी लेशमात्र भी
जो दीखता सब है लीला
तेरी, तू ही विश्वनियन्ता
जैसे चाहे तू खेला 

कर जोडें
हम करे ये विनती
हमको इतना ज्ञान रहे
हम हैं तेरे अंश सदा ही
बस तेरा ही ध्यान रहे 

भुवनेश्वर २६.०२.२०११  ००:०४ 




Wednesday, February 23, 2011

मित्र के विवाह पर बधाईयाँ

सुखी गृहस्थी हो
चहके आँगन
संतोष रहे सदा मन में
प्रीत हो पक्की
एक दूजे से
सदा वसंत हो जीवन में !

Tuesday, February 22, 2011

पल

लम्हे फिसलते जा रहे हैं हाथो से
रेत की जैसे...
वक़्त
पल पल कर गुज़र रहा है
धीरे धीरे...
कुछ हैं मतवाले जो
पकड़ना चाह रहे हैं
इन लम्हों को
और कुछ
खुश है के
वे ये लम्हे जी पाए !!

- भुवनेश्वर २१.०२.२०११ 

Saturday, January 01, 2011

प्रार्थना

न भूख हो, न भय हो, 
और न ही बेबसी न लाचारी हो,
हे ईश्वर ! ये नववर्ष सर्वथा
पूरण सुखकारी हो !
हो प्रेम जगत में, भाईचारा
बढे, रहे सुख शांति.
सोते से जागे सारे जन
होवे अब नूतन क्रांति -
क्रांति हो सुख की, समृद्धि की
क्रांति ये होवे ज्ञान की 
हो राम, रहीम या ईसा -
सब को होवे समझ भगवान की !
दीप्त ह्रदय हो, उन्नत मस्तक,
मुद्रा गर्वोंकारी हो -
हे ईश्वर ! ये नववर्ष सर्वथा
पूरण सुखकारी हो 

- भुवनेश्वर ०१.०१.२०११, ००:३६