और तुम्हे भी, मेरी प्यारी -
तोडूंगा न वचन कभी ये
चाहे बोले दुनिया सारी !
लेकिन मैंने खुद ही अपने
से अपना ही रुख मोड़ा है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!
तुमको जब वो वचन दिया था
नहीं पता था कैसा जग है?
कितने कांटे बिखरे हैं औ'
कितनी बाधा हर एक पग है !
पथ के तीक्ष्ण उन्ही कांटो ने
मेरा सरल-कवच फोड़ा है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!
टूट गया है वादा अब ये
हुआ न जाने बुरा या भला ?
ठीक डगर पकड़ी है मैंने
या मैं राह पतन की चला ?
जो भी हो, प्रारब्ध ही होगा -
निश्चय नियति पे छोड़ा है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!
uttam rup se bhavon ko vyakt kiya hai... adbhut prastuti..
ReplyDeletebahut dukhi hoke likh raha hai bhai...thanda ho jaa..khushi ki kavitayein likh..
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