साथ तुम्हारा छूट गया है...
१. संग मेरे तुम रहती हरदम
संग सदा चलती थी मेरे
कुछ न था तेरा न मेरा
सुख दुःख सब थे मेरे तेरे
जनम जनम का जो था सोचा
रिश्ता अब वो टूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है..
२. कितने दिन और कितनी रातें
कितनी ! हाँ, कितनी ही बातें
मैंने तुझको तुने मुझको
जो बतलाई नैन की पातें
जीवन भर थी जो सारी
हाय ! उन बातो का संचय
न जाने सहसा ही कोई
कौन लुटेरा लूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है..
३. माना था बस तुमको अपना
बाकि सारा जग था सपना
सपनो के सपने ही बुनते
देख सका सच्चाई तक ना-
सपने से जागा तो देखा
छन-से शीश फूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है...
dard bhari ek sundr anubhuti...
ReplyDeleteBahut sundar-----khoobasurat shabdo.n men abhivyakti.
ReplyDeletePoonam
साथ तुम्हारा छूट गया है...
ReplyDelete१. संग मेरे तुम रहती हरदम
संग सदा चलती थी मेरे
कुछ न था तेरा न मेरा
सुख दुःख सब थे मेरे तेरे
Sundar1...lakin dardse sarabor!
कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
ReplyDeleteधरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
कलम के पुजारी अगर सो गये तो
ये धन के पुजारी
वतन बेंच देगें।
हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .
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ReplyDeleteu are a poet and vishesh didnt even kno it..
ReplyDeleteइस नए चिट्ठे के साथ आपको हिंदी चिट्ठा जगत में आपको देखकर खुशी हुई .. सफलता के लिए बहुत शुभकामनाएं !!
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