Sunday, February 28, 2010

क्या बस मेरी ही गलती है ?

क्या बस मेरी ही गलती है ?

१. जब आई थी तुम मेरे जीवन में पहली पहली बार
कृश थी, थकी हुई जीवन से - हार मान ने  को तैयार |
कितनी कोमल, कितनी नाज़ुक, कितनी सहमी सहमी-सी
कोई बोले जोर से थोडा - लगती गहमा गहमी सी !
सोचा करता उन सब को, यादों की गाडी चलती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?

२. तुम को कितने जतन संजोया, माना जैसे मेरी बच्ची !
आंसू हर एक धोया तेरा, बातें कितनी झूठी सच्ची
बोल बोल के तुझे मनाया, रोते से था तुझे हंसाया
इतना कर के भी, सोना ओ ! खोया तुझको न फिर पाया |
यादें बातें सारी अब वो नैनो से निकलती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?

३. धीरे धीरे, मद्धम मद्धम तुम लौटी वापस दुनिया में -
पाया जो विश्वास था खोया, देख तुम्हे कितना खुश था मैं !
"मेरी बच्ची , मेरी प्यारी अब वो सब हासिल कर पायेगी
जो उसका अधिकार है - न दुनिया उसे कुछ  कह पायेगी"
कितना भी भूलूं उन सब को, नहीं भूलते बनती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?

४. जो भी हुआ है तेरा मेरा, तू तो सदा रहेगी मेरी 
बच्ची, मेरी प्यारी तू है- सदा रहे खुशियों से घेरी !
जो भी खोया मुझ में तूने ,तुझको मिले सवाई वापस 
प्यार मिले जीवन में सच्चा, निहित रहो आपस ही आपस |
एक यही भावना, मेरे दिल से निकलती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?




हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!

बोला था तुमको मैंने माँ
और तुम्हे भी, मेरी प्यारी -
तोडूंगा न वचन कभी ये
चाहे  बोले दुनिया सारी !
लेकिन मैंने खुद ही अपने 
से अपना ही रुख मोड़ा है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!

तुमको जब वो वचन दिया था
नहीं पता था कैसा जग है?
कितने कांटे बिखरे हैं औ'
कितनी बाधा हर एक पग है !
पथ के तीक्ष्ण उन्ही कांटो ने
मेरा सरल-कवच फोड़ा  है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!

टूट गया है वादा अब ये
हुआ न जाने बुरा या भला ?
ठीक डगर पकड़ी है मैंने
या मैं राह पतन की चला ?
जो भी हो, प्रारब्ध ही होगा -
निश्चय  नियति पे छोड़ा है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!






Thursday, February 25, 2010

महानायक

क्रिकेट जगत जो महानायक
कौन है जो है क्रिकेट-नरेश
उन्नत शीश है जिसकी खातिर
हाँ ! हाँ ! वो है सचिन रमेश !!

शतकवीर वो शूरवीर
वो भारत मा का वीर सपूत
अपना-सा वो एक निराला
कोई नहीं न भविष्य-भूत

आन हमारी शान हमारी
वो ही अपना है भगवान्
धन्य धन्य तुम तेंदुलकर ओ !
तुम हो १०० करोड़ की जान !!

Monday, February 22, 2010

साथ तुम्हारा छूट गया है

साथ तुम्हारा छूट गया है...
१. संग मेरे तुम रहती हरदम
संग सदा चलती थी मेरे
कुछ न था तेरा न मेरा
सुख दुःख सब थे मेरे तेरे
जनम जनम का जो था सोचा
रिश्ता अब वो टूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है..
२. कितने दिन और कितनी रातें
कितनी ! हाँ, कितनी ही बातें
मैंने तुझको तुने मुझको
जो बतलाई नैन की पातें
जीवन भर थी जो सारी
हाय ! उन बातो का संचय
न जाने सहसा ही कोई
कौन लुटेरा लूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है..
३. माना था बस तुमको अपना
बाकि सारा जग था सपना
सपनो के सपने ही बुनते
देख सका सच्चाई तक ना-
सपने से जागा तो देखा
छन-से शीश फूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है...