Monday, May 24, 2010

तो शायद कुछ अच्छा होता...

'गर तुम मुझ से प्यार न करतीं
'गर तुम यूँ मुझ पर न मरतीं
तो शायद कुछ अच्छा होता...

न सोचा करतीं तुम ऐसे
भला रहूँ मैं रहूँ जहाँ भी
'गर चुप्पी हमको न अखरती  -
तो शायद कुछ  अच्छा होता..

होती तुम भी औरों जैसीं  
वफ़ा निभाना खुदा न होता
सोच ज़रा यूँ दूर निकलती-
तो शायद कुछ अच्छा होता..
- वाशी, २४.०५.१० 

Sunday, May 23, 2010

আমায় মনে রেখো (Amai Mone Rekho)

যদি কখন চোখের কনে জল আশে
মনে হয়ে আমি ছিলাম তোমার কাছে
যদি কখন ভাভ তুমি আর আমি ছিলাম এক প্রাণ - 
তবে আমায় মনে রেখো...
Jodi kokhon chokher kone jal aashe
mone hoye ami chhilam tomar kacche
jodi kokhon bhabe tumi ar ami chhilam ek pran-
tobe amai mone rekho..

कभी अगर जो नेत्र पलक पे जल छलके
मन हो की 'गर काश मैं होता पास तुम्हारे
कभी अगर जो लगे तुम्हे यूँ 
रहे तुम और मैं बन कर १ प्राण -
तब रखना मुझको तुम अपने मन में...

Sunday, March 28, 2010

স্বপ্নের পাখি (सपनो का पंछी)

স্বপ্নের পাখি আমার উড়ে উড়ে জয়ে, রে !
স্বপ্নের পাখি তোমার বডি ঘুরে আয়ে, রে !
স্বপ্নের পাখি আমার বলছে আমাকে -
"বন্ধু, তোমার শোনা, ও রে, ভাবছে তোমাকে"


सपनो का पंछी मेरा उड़ उड़ जाता है, रे !
सपनो का पंछी तेरे घर हो के आता है, रे !
सपनो का पंछी मेरा मुझे ये है बोलता -
"बंधू मेरे, तेरा प्रिय तुझको है सोचता" 



Sunday, March 21, 2010

डूब रहा हूँ


डूब रहा हूँ तनहा तनहा
धीमे धीमे गहरे गहरे
अनजाने से लगते सारे
जाने पहचाने से चेहरे

दूर भागता अपने से ही
जाने कहाँ चला आया हूँ
नहीं जानता कौन हूँ मैं अब
बस अपना ही एक साया हूँ

कहाँ है जाना कौन ठिकाना
कौन डगर है पता नहीं है
किसको मानू कौन है अपना
कौन पराया पता नहीं है

किस मंजिल पे थमने वाला 
कैसे है कारवां ये मेरा
आज  अकेला एकदम है जो
कल तक था हमनवां जो तेरा

ढूंढ रहा हूँ कोई ऐसा 
जो मुझको थामे थोडा-सा 
रोक ले मुझको बस इतने पे
सहलाये मन का फोड़ा-सा

जब किस्मत में होगा मिलना
तब ही मैं पाउँगा उसको
यक्ष प्रश्न तो यही है तब तक
थामूं मैं, हाँ, थामूं किसको ?

Sunday, February 28, 2010

क्या बस मेरी ही गलती है ?

क्या बस मेरी ही गलती है ?

१. जब आई थी तुम मेरे जीवन में पहली पहली बार
कृश थी, थकी हुई जीवन से - हार मान ने  को तैयार |
कितनी कोमल, कितनी नाज़ुक, कितनी सहमी सहमी-सी
कोई बोले जोर से थोडा - लगती गहमा गहमी सी !
सोचा करता उन सब को, यादों की गाडी चलती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?

२. तुम को कितने जतन संजोया, माना जैसे मेरी बच्ची !
आंसू हर एक धोया तेरा, बातें कितनी झूठी सच्ची
बोल बोल के तुझे मनाया, रोते से था तुझे हंसाया
इतना कर के भी, सोना ओ ! खोया तुझको न फिर पाया |
यादें बातें सारी अब वो नैनो से निकलती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?

३. धीरे धीरे, मद्धम मद्धम तुम लौटी वापस दुनिया में -
पाया जो विश्वास था खोया, देख तुम्हे कितना खुश था मैं !
"मेरी बच्ची , मेरी प्यारी अब वो सब हासिल कर पायेगी
जो उसका अधिकार है - न दुनिया उसे कुछ  कह पायेगी"
कितना भी भूलूं उन सब को, नहीं भूलते बनती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?

४. जो भी हुआ है तेरा मेरा, तू तो सदा रहेगी मेरी 
बच्ची, मेरी प्यारी तू है- सदा रहे खुशियों से घेरी !
जो भी खोया मुझ में तूने ,तुझको मिले सवाई वापस 
प्यार मिले जीवन में सच्चा, निहित रहो आपस ही आपस |
एक यही भावना, मेरे दिल से निकलती है |
क्या बस मेरी ही गलती है ?




हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!

बोला था तुमको मैंने माँ
और तुम्हे भी, मेरी प्यारी -
तोडूंगा न वचन कभी ये
चाहे  बोले दुनिया सारी !
लेकिन मैंने खुद ही अपने 
से अपना ही रुख मोड़ा है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!

तुमको जब वो वचन दिया था
नहीं पता था कैसा जग है?
कितने कांटे बिखरे हैं औ'
कितनी बाधा हर एक पग है !
पथ के तीक्ष्ण उन्ही कांटो ने
मेरा सरल-कवच फोड़ा  है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!

टूट गया है वादा अब ये
हुआ न जाने बुरा या भला ?
ठीक डगर पकड़ी है मैंने
या मैं राह पतन की चला ?
जो भी हो, प्रारब्ध ही होगा -
निश्चय  नियति पे छोड़ा है -
हाँ ! मैंने वादा तोडा है !!






Thursday, February 25, 2010

महानायक

क्रिकेट जगत जो महानायक
कौन है जो है क्रिकेट-नरेश
उन्नत शीश है जिसकी खातिर
हाँ ! हाँ ! वो है सचिन रमेश !!

शतकवीर वो शूरवीर
वो भारत मा का वीर सपूत
अपना-सा वो एक निराला
कोई नहीं न भविष्य-भूत

आन हमारी शान हमारी
वो ही अपना है भगवान्
धन्य धन्य तुम तेंदुलकर ओ !
तुम हो १०० करोड़ की जान !!

Monday, February 22, 2010

साथ तुम्हारा छूट गया है

साथ तुम्हारा छूट गया है...
१. संग मेरे तुम रहती हरदम
संग सदा चलती थी मेरे
कुछ न था तेरा न मेरा
सुख दुःख सब थे मेरे तेरे
जनम जनम का जो था सोचा
रिश्ता अब वो टूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है..
२. कितने दिन और कितनी रातें
कितनी ! हाँ, कितनी ही बातें
मैंने तुझको तुने मुझको
जो बतलाई नैन की पातें
जीवन भर थी जो सारी
हाय ! उन बातो का संचय
न जाने सहसा ही कोई
कौन लुटेरा लूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है..
३. माना था बस तुमको अपना
बाकि सारा जग था सपना
सपनो के सपने ही बुनते
देख सका सच्चाई तक ना-
सपने से जागा तो देखा
छन-से शीश फूट गया है
साथ तुम्हारा छूट गया है...