Monday, January 14, 2008

सपना

सपना देखा था एक मैंने ,
सपना - जो अब टूट गया है -
जीवन पथ का जो साथी था -
किसी मोड़ पर छूट गया है ...

साथ था जो परछाईं जैसे -
मुझसे जो न कभी जुदा था ,
दूर न अब है जाने कितना ,
साथ मेरा सुख लूट गया है ..
सपना देखा था एक मैंने ,
सपना - जो अब टूट गया है !

देख न पाता था जो मेरी
पीड़ा छोटी से छोटी भी -
कशिश दर्द अब निशां है बाकी
जैसे छाला फ़ूट गया है
सपना देखा था एक मैंने ,
सपना - जो अब टूट गया है !

2 comments:

  1. haath ki kundli mein saagar samet liya hai ...
    kuch panktiyoon ki kavita mein poore jahan ka dard lapet liya hai :)

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  2. thinking a lot, but not getting words, what to say..3 para to describe everything..

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