Tuesday, October 30, 2007

याचना

इस जग-जगती के प्राणों में ,
हो बस तेरा आधार , हरे !

इस सकल जगत की क्रीडा में ,
होवे लीला विस्तार , हरे !!

हो लक्ष्य यही इस जीवन का -
पावें तुझको साकार , हरे !

इतनी तू कृपा कर दे , भगवन ,
रहे ह्रदय में तेरा प्यार , हरे !!

३० .०६ .०६
दोपहर

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