Wednesday, December 21, 2016

उत्सव

मातृत्व प्रकृति का उत्सव है
एक नूतन जीव बनाने का -
एक नई किरण , एक नई पुलक
को इस संसार में लाने का !

ये उत्सव है नवजीवन का -
आरंभ नए का उत्सव है ,
उत्साह नया , संकल्प नए -
ये नव -स्वप्नों का उत्सव है !

नौ मास जो कष्ट सहे माँ ने -
नौ मास जो माँ ने पीड सही -
उस अग्निपरीक्षा की परिणिति का -
तप-सिद्धि का उत्सव है !

नन्हें शिशु की एक मुदित हँसी
पर वारि जाते मात -पिता ;
किंतु ये तो निर्दोष रुदन पर
हो गर्वित - ये उत्सव है !

जीवन में नव -वसंत आया
एक नव -बयार सी आई है ,
घर आँगन में नन्हें की
किलकारी जब से छाई है ....

चाहे हो दिवस भले कोई ,
कोई नक्षत्र , हो कोई समय -
हे बालक ! तेरे आने से
अब सकल समय ही उत्सव है !!

२१ .०२ .०६

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