Thursday, December 22, 2016

नवांकुर

एक नूतन अंकुर जन्मा है ,
एक नवजीवन के प्राण लिए ...

१ .पतझड़ , गर्मी , वर्षा , जाड़े -
कितने मौसम थे बीत गए ;
रोते रोते थे माली के , वे
नयन अमय भी रीत गए ...
सब आस निरास में बदल गई
थी , चारों ओर था तमस गहन ,
तब आए हो तुम हे नन्हें !
- नवप्रभात का सा ज्ञान लिए ..
एक नूतन अंकुर जन्मा है ,
एक नवजीवन के प्राण लिए ...


२ . था दैव एक ही अवलंबन ,
आलौकिक एक सहारा था ,
कितनी विनती ! कितनी पूजा !
हाँ , बहुविध तुम्हे पुकारा था ..
कितनी मिन्नतें की - आए हो तब
एक देव सिद्ध वरदान लिए ...
एक नूतन अंकुर जन्मा है ,
एक नवजीवन के प्राण लिए ...

३ .ये अंकुर बढे सदा , हरदम -
ले जड़े जमा वटवृक्ष बने -
हो वज्र कठोर तना जिसका -
सुकोमल सी कोंपलें रहे ...
वह रहे हरा औ' घना सदा
हम रहे यही अरमान लिए ...
एक नूतन अंकुर जन्मा है ,
एक नवजीवन के प्राण लिए ...

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