Wednesday, December 28, 2016

कभी तनहाई में

वर्षा की उस प्रथम बूँद -सी
सौंधी खुशबू दे जाता है ,
तनहाई में कभी कभी जब
प्रथम प्रेम वो याद आता है ...

सहज , विमल , वो चंद्र किरण -सी
मृदु हँसी तेरी है बाकी -
लेकिन कभी वो तेरा रोना ,
और तुनकना याद आता है .
तनहाई में कभी कभी जब
प्रथम प्रेम वो याद आता है ...

कितने ही जो साथ बिताये
मैंने - तूने पल जो प्यारे -
बातें करती आंखें अपनी ,
वो चुप रहना याद आता है .
तनहाई में कभी कभी जब
प्रथम प्रेम वो याद आता है ...

बीत गए सब निशा - दिवस वो ,
बीत गए वो चंचल सपने ;
फिर भी यादों के रस्ते जब
कोई स्वप्न दिल धड़काता है -
तनहाई में कभी कभी तब
प्रथम प्रेम वो याद आता है ...

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