संगीत खो चुका हूँ ,
मैं तान खो चुका हूँ ,
हा ! हारता गया मैं ,
पहचान खो चुका हूँ ...
न कोई आस बाकी ,
न ही कोई उमंगें -
अब न रहा वो सागर ,
अब न रही तरंगे ...
मुर्दा है जिस्म अब ये ,
पर मैं तो जीं रहा हूँ ;
ये जीना कैसा जीना -
मैं जान खो चुका हूँ ...
hemant ji main aapki kuch rachnao apne blog par parkasit karna chata hoon agar aap ki izajat ho to
ReplyDeletekhaskar vilap
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