Friday, September 28, 2007

अंतर्दर्शन / खोज

रिश्ते सारे अब बदल गए
मुझ में तुझ में वो बात नही .
अब राहें अपनी जुदा -जुदा
कुछ तेरा -मेरा साथ नही .

पर पता नही क्यों कभी कभी
न जाने कहाँ से , चुपके -से
एक याद तेरी जो आती है
जागे कुछ अरमां दुबके -से .

'मैंने तुझको है भुला दिया '
ये मन तो मान नही पाता ,
मैं मूर्ख बनाता हूँ ख़ुद को -
आइना मुझे ये दिखलाता .

मैं तो अब ख़ुद से हार चुका
तेरी बातें करते करते ,
अब ' वो ' ही राह दिखायेगा -
मैंने सोचा चलते चलते .

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